2 मई 2020 - 17:20
भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत और हिंसा पर क्यों आक्रोश में आ गए अरब, क्या दुनिया भर में फैली चिंता को नज़रअंदाज़ कर पाएगी

पिछले दो हफ़्ते के दौरान इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी, कुवैत सरकार, इमारात की एक राजकुमारी और बहुत सारे अरब एक्टीविस्ट्स ने भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरी बयानबाज़ी का नोटिस लिया है। चरमपंथी हिंदू, मुसलमानों को कोरोना वायरस फैलाने का दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

फ़ार्स खाड़ी के देशों में ट्वीट्स और बयानों की एक लहर उठी है जिसमें भारतीय मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और नफ़रत भरे बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जा रही है। नतीजा यह निकला कि भारत सरकार को प्रतिक्रिया देनी पड़ी। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ट्वीट में ज़ोर दिया कि कोविड-19 धर्म और जाति में कोई अंतर नहीं करता।

इसकी शुरुआत उस समय हुई जब कट्टरपंथी हिंदुत्व विचार के लोगों ने तबलीग़ी जमाअत के जलसे में शामिल होने वालों के ख़िलाफ़ बेतुकी बयानबाज़ी शुरू कर दी। उन्हें मानव बम और कोरोना जेहादी का नाम देने लगे।

भारत के गृह मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा कि देश में कोरोना वायरस के लगभग 15 हज़ार मामलों में 4 हज़ार का संबंध तबलीग़ी जमाअत से है।

इसके बाद तो सोशल मीडिया पर जैसे इस्लामोफ़ोबिया का एक तूफ़ान खड़ा हो गया। कट्टरपंथी हिंदू विचारधारा रखने वालों ने जिनमें बहुत से फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों में नौकरियां या कारोबार करते हैं मुसलमानों

इस संदर्भ में दुबई में रहने वाले एक भारतीय सौरभ उपाध्याय और भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के ट्वीट पर बहुत बवाल हुआ।

क़तर युनिवर्सिटी में पोलिटिकल साइंस के टीचर डाक्टर फ़रहान मुजाहिद चाक का कहना है कि हिंदू फ़ासीवादियों ने जिस स्तर पर जाकर हमले किए उससे पूरी दुनिया में चिंता पैदा हो गई।

इमारात की राजकुमारी ने चेतावनी दी कि नस्लवादी और भेदभावपूर्ण बयानबाज़ी करने वाले भारतीयों को सज़ा दी जाएगी और इमारात से जाने पर मजबूर कर दिया जाएगा।

एक महीने के दौरान कम से कम 6 कट्टरपंथी हिदुंओं को सोशल मीडिया पर इसी प्रकार की पोस्ट डालने के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ा या सज़ा भुगतनी पड़ी।

फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों में लगभग 85 लाख भारतीय काम करते हैं जिनमें एक बड़ी संख्या हिंदुओं की है। इन देशों से भारत का सालाना 100 अरब डालर का व्यापार होता है। 55 अरब डालर से ज़्यादा रक़म अरब देशों में काम करने वाले भारतीय अपने देश भेजते हैं।

कुवैत स्थित सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुर्रहमान नस्सार ने ट्वीट किया कि भारतीयों के साथ जिनमें बड़ी संख्या हिंदुओं की है अच्छा बर्ताव किया जाता है तो सवाल यह है कि इसके बदले में भारत में मुसलमानों के साथ क्या हो रहा है?

कुवैत के एक वकील और मानवाधिकार ग्रुप के डायरेक्टर मिजबिल अलशरीका ने ट्वीट किया कि वह भारत के मुसलमानों का मुद्दा बिना कोई फ़ीस लिए जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद में उठाएंगे।

अभी सोमवार को कुवैत ने इस मुद्दे को उठाया और भारतीय मुसलमानों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर गहरी चिंता जताते हुए ओआईसी से मांग की कि इस मामले में हस्तक्षेप करे।

कुवैत की मंत्री परिषद के जनरल सेक्रेट्रिएट से जारी बयान में कहा गया कि भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो लोग मानवता विरोधी अपराध कर रहे हैं और उनके अधिकारों का हनन कर रहे हैं, क्या वह समझते हैं कि दुनिया के मुसलमान इन अपराधों पर ख़ामोश रहेंगे और कोई राजनैतिक, क़ानूनी और आर्थिक कार्यवाही नहीं करेंगे?

इससे पहले 18 अप्रैल को ओआईसी ने भी एक बयान जारी करके भारत सरकार पर ज़ोर दिया कि देश में बहुत तेज़ी से फैल रहे इस्लामोफ़ोबिया पर अंकुश लगाए। इस बयान के एक दिन बाद मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि कोविड-19 जाति, धर्म, रंग, नस्ल, भाषा और सीमा में कोई अंतर नहीं करता।

मोदी के ट्वीट के बाद अरब देशों में कम से कम तीन भारतीय दूतावासों ने सहिष्णुता और बाहुल्यवाद के बारे में ट्वीट किए।

यही नहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोगों की ग़लती के लिए पूरी कम्युनिटी को दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

भाजपा के प्रवक्ता जीवीएल नरसिंहा ने अलजज़ीरा से कहा कि इस मामले का अरब देशों के साथ भारत के अच्छे रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा क्योंकि यह हक़ीक़त नहीं बल्कि केवल प्रोपैगंडा है।

मंगलवार को यह मामला उस समय और गर्मा गया जब यूएस कमीशन आन इंटरनैशनल रिलीजस फ़्रीडम ने अमरीकी विदेश मंत्रालय से मांग की कि भारत को गंभीर चिंता वाले देशों की सूचि में शामिल करे क्योंकि इस देश में धार्मिक आज़ादी का गंभीर रूप से हनन किया जा रहा है।

भारत ने अमरीकी रिपोर्ट को तो पक्षपाती कह दिया है लेकिन भारत की हिंदूत्ववादी सरकार के लिए भारतीय मुसलमानों पर हो रहे हमलों को लेकर दुनिया भर में फैल रही चिंता को नज़रअंदाज़ कर पाना संभव नहीं होगा।

स्रोतः अलजज़ीरा

पर हमले शुरू कर दिए।